सामान्य प्रश्न

सुनामी संकट में सीएसआईआर की भूमिका क्या थी?

सुनामी राहत में सीएसआईआर के प्रयास समय पर बहुआयामी और बड़े रहे हैं। जीवित बचे लोगों के कष्टों को कम करने के लिए सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं ने अपने वैज्ञानिक और तकनीकी कौशल की पेशकश की। इन प्रस्तावों और पहलों में आश्रय, खाना, पीने का पानी और चल रहे अध्ययन है, जो भविष्य में आपदाओं से निपटने के हमारे ज्ञान और कौशल में सुधार करेंगे। इस ने अपने इतिहास में तत्काल भोजन का सबसे बड़ा उत्पादन किया। लगभग ५०००० से १००००० की भोजन की जरूरत को पूरा करने के लिए रोजाना 2 टन भोजन प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। खाद्य वस्तुओं में स्थानीय लोगों की पाक-वरीयताओं और बच्चों की विशेष पोषण आवश्यकता को ध्यान में रखा गया। सीएसएमसीआरआई ,भावनगर ने प्रभावित क्षेत्रों में रिवर्स ऑस्मोसिस प्रक्रिया से पेयजल आपूर्ति प्रदान की। सीबीआरआई, रूरकी ने प्रभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिकों की एक टीम रवाना कि। यह मौजूदा बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए व्यवहारिक समाधान प्राप्त करके तबाह क्षेत्रों के पुनर्वास में बैकअप के समर्थन प्रदान करने के लिए तैयार है। एससीआरसी, चेन्नई में क्षतिग्रस्त भवनों की संरचनात्मक आकलन में जीवित बचे लोगों की मदद करने का प्रस्ताव दिया है और वह मरम्मत/उपचारात्मक उपायों का सुझाव देगा। एनआईओ के वैज्ञानिक समुद्र तल के नीचे के भूकंप का पता लगाने के लिए एक प्रणाली पर काम कर रहे हैं। एनजीआरआई की भूकंप वेधशाला ने भूकंप और बाद के झटकों का मापन किया। यह क्षेत्र पर लगातार नजर रखे हुए हैं और जानकारी प्रदान करते रहते हैं ताकि उचित कार्यवाही की जा सके और जान माल का खतरा कम से कम किया जा सके।

सरस की विशेषताएं क्या है?

सरस एक 14 सीटर वाला 2 इंजन का टर्बोप्रॉप विमान है जो यात्री सुविधा के लिए पूर्ण रूप से दाबानुकूलित है। इसकी अधिकतम गति ६०० किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक है और १२०० किलोमीटर की अधिकतम सीमा है। इसकी अत्याधुनिक तकनीक, बिजली एवं पर्यावरण नियंत्रण और अन्य प्रणालियां इसे 21वीं सदी का समकालीन विमान बनाती हैं

टीकेडीएल क्या है ?

पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी(टीकेडीएल) आयुष विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के साथ एक सहयोगी परियोजना है। इस नेटवर्क परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत के पारंपरिक ज्ञान की संग्रह विरासत का दुरुपयोग रोकना है। यूएसपीटीओ द्वारा हल्दी पर और ईपीओ द्वारा नीम पर गलत पेटेंट के अनुदान का बेस्वाद अनुभव भारत को रहा है। इन पेटेंटों पर भारत द्वारा सफलतापूर्वक चुनौती दी गई और एक महंगी और समय लेने वाली प्रक्रिया से यह निरस्त किए गए थे। टीकेडीएल डेटाबेस पेटंट परीक्षकों को पारंपरिक ज्ञान से जुड़े पेटेंटों को सत्यापित करने का एक आसानी से उपलब्ध, सुलभ और सुयोग्य स्रोत प्रदान करता है। टीकेडीएल -आयुर्वेद का पहला चरण एक उन्नत आईटी सॉफ्टवेयर की मदद से 14 आयुर्वेदिक ग्रंथों से निकाली गई जानकारी एवं प्रतिकृतियां 5 विश्व भाषाओं- अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, जापानी में प्रस्तुत करता है। 36000 से ज्यादा योगों को पेटेंट आवेदन के रूप में अनुलेखित किया गया है। वर्तमान में दूसरा चरण प्रगति पर है जो यूनानी, सिद्ध और आयुर्वेद पर बचे शेष कार्य को पूरा करेगा। टीकेडीएल-यूनानी 77000 युगों को पूरा करेगा। टीकेडीएल के विनिर्देशों के आधार पर टीके डेटाबेस और रजिस्ट्रियों की स्थापना के लिए अंतर्राष्ट्रीय विनिर्देशों और मानकों की स्थापना करने में टीकेडीएल सक्षम रहा है। यह डब्ल्यूआईपीओ के बौद्धिक संपदा और अनुवांशिक संसाधन, पारंपरिक ज्ञान और अभिव्यक्ति की लोकगीत पर अंतर सरकारी समिति(आईजीसी) के चौथे सत्र में पेश किया गया था। भारत द्वारा प्रस्तुत तकनीकी मानकों को आईजीसी समिति के पांचवें सत्र में अपनाया गया था। अपने पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग से रक्षा करने हेतु टीकेडीएल को दूसरे देश के देशों के लिए एक मॉडल के रूप में पेश किया गया और कई देश क्षेत्र में सीएसआईआर से सहयोग की मांग कर रहे हैं

जैव सूचना विज्ञान के क्षेत्र में सीएसआईआर की सफलताओं क्या हैं?

BioSuite अठारह अनुसंधान संस्थानों और तीन उद्योगों, एक साथ लाया गया, व्यापक पोर्टेबल और बहुमुखी सॉफ्टवेयर पैकेज का नामकरण विकसित करने के लिए 'BioSuite'। टीसीएस के नेतृत्व में टीम सॉफ्टवेयर है, जो विविध जीन विश्लेषण से तुलनात्मक जीनोमिक्स, अनुरूपता मॉडलिंग और आणविक दृश्य एवं औषधि डिजाइन करने के लिए जोड़-तोड़ करने के लिए मार्ग मॉडलिंग से लेकर bioanalyses से बाहर ले जाने के लिए एक बहुउद्देशीय उपकरण के रूप में काम करेगा विकसित की है। सॉफ्टवेयर कई अनूठी विशेषताएं है, जो इसी तरह के अन्य संकुल बाजार में उपलब्ध में मौजूद नहीं हैं। BioSuite 114 उप मॉड्यूल और 243 एल्गोरिदम से जुड़े आठ मॉड्यूल शामिल हैं। SofComp NMITLI हकदार परियोजना, "लागत प्रभावी सरल कार्यालय कंप्यूटिंग (SofComp) मंच पीसी को बदलने के लिए" लिनक्स पर आधारित मंच प्रौद्योगिकी को विकसित करने की मांग की। सरल कार्यालय कंप्यूटर (SofComp) इस प्रकार के एकीकरण और कई नई सुविधाओं के एक उच्च डिग्री के साथ एक सिस्टम पर चिप वास्तुकला पर आधारित हैं।

स्वास्थ्य सेवा एक आम नागरिक की मुख्य चिंताओं में से एक है। माशेलकर समिति ने राष्ट्रीय ऑटो इंधन नीति पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सीएसआर इस पर और क्या कर रहा है ?

डॉक्टर आर. ए. माशेलकर की अध्यक्षता में तैयार इंधन निधि ने ऑटो उत्सर्जन पर भारतीय मानक तैयार करने और इस क्षेत्र में वैज्ञानिक मानकों की तरफ बढ़ने के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। "भारत द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ" मानक विकसित मानचित्र के हिसाब से चरणों में प्रभाव में आएँगे। ऑटो इंजनों में बदलाव में उत्प्रेरक कन्वर्टरों के उपयोग आदि के अतिरिक्त इंधन की गुणवत्ता एक मुख्य आवश्यकता है। एक एनएमएलटीएलआई समर्थित कार्यक्रम के तहत इंधन की गुणवत्ता बेहतर करने का प्रयास शुरू किया गया है और नया उत्प्रेरक भी विकसित किया गया है। उत्प्रेरक की डीजल को डिसल्फराइज़ करने की दक्षता उल्लेखनीय है जिसे एचडीएस इकाई के पहले चरण में लगभग २५०० पीपीएम सल्फर से ५०० पीपीएम से कम में प्राप्त किया गया है। यह साधारण रिफाइनरी प्रक्रिया की परिस्थितियों में कार्य करता है, अर्थार्थ 340 डिग्री सेल्सियस और 40 बार दबाव। विकसित उत्प्रेरक 30 बार के दबाव पर भी सक्रिय है। यह विकास भारत द्वितीय से चतुर्थ के उत्सर्जन मानकों के अनुसार बेहतर गुणवत्ता वाले डीजल उपलब्ध कराने में बहुत मदददायी होगा। कारखानों की परिस्थितियों में उत्प्रेरक का परीक्षण करने के लिए एक रिफाइनरी की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या सीएसआईआर हमारे समुद्री संसाधनों को चिकित्सीय उत्पादन के स्रोत के रूप में देख रहा है ?

समुद्री संसाधन से संपन्न देश के एक प्रमुख विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में सीएसआईआर भी हमारे महासागरों की छानबीन कर रहा है। हर्बल उपचार और दवाइयों के विकास करने हेतु समुद्री वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को उपयोग में लाने के लिए परियोजना महासागर मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषण एवं भाग लेने वाली 10 प्रयोगशालाओं के सहयोग से केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा समायोजित "सागर से दवा" परियोजना आयोजित की जा रही है। सक्रिय अणुओं के अलगाव, उनके लक्षण और विकास एवं दवा अनुसंधान सहित सभी पहलुओं को कार्यक्रम में शामिल किया गया है। कई आशाजनक नमूने पाए गए हैं।

विश्व हर्बल दवाओं की ओर बढ़ रहा है, क्या सीएसआईआर भी इस आंदोलन का हिस्सा है?

निश्चित रुप से! सीएसआईआर के हर्बल चिकित्सीय कार्यक्रम में हर्बल सामग्रियों को चिकित्सीय के रूप में विकसित करने का प्रयास शामिल है। यह हर्बल सामग्रियां सभी उचित अध्ययन अर्थार्थ मानकीकरण, जैविक गतिविधि सत्यापन, सुरक्षा प्रभावकारिता और नैदानिक अध्ययन करने के पश्चात ही विकसित की जा रही हैं। विकसित उत्पादों को फिर चिकित्सीय के रूप में भारतीय और विदेशी बाजारों में पेश किया जाएगा। यूएसआरसीसी आर एयूएस के साथ सीएसआईआर का सहयोग इस दिशा में एक बड़ी पहल है।

बायोऎक्टिवेस/जैव सक्रियों पर सीएसआईआर की योजना क्या है ?

जैव सक्रियों पर सीएसआईआर योजना एक विशाल तंत्र है जो अनुसंधान एवं विकास योजना प्रभाव सीएसआईआर द्वारा समायोजित किया जा रहा है। यह पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में 20 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं,13 विश्वविद्यालयों और तीन जाने-माने संगठनों से संलग्न है। इस में नए नेतृत्व अणुओं की पहचान के लिए कैंसर टीबी, फाइलेरिया, मलेरिया, अल्सर, पार्किंसन और अल्जाइमर सहित 14 रोग क्षेत्रों के खिलाफ आयुर्वेदिक सूत्रीकरण, पौधों का कवच, रोगाणुओं की जांच शामिल है। विभिन्न समर्पित समूहों के अच्छी तरह से परिभाषित कार्य के साथ सम्मान तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इंटेग्रेटिव मेडिसिन(पहले आरआरएल, जम्मू के नाम से प्रचलित) यूनानी दवाओं की जांच के लिए प्रधान प्रयोगशाला है। इसकी गतिविधियां संयंत्र, संग्रह, प्रमाणिकरण और उंगली मुद्रण समन्वय करने में भाग लेना है। यह जैविक गतिविधियों में भाग लेता है वह उन्हें समायोजित करता है जैसे कि भाग लेने वाली संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए नमूनों की कैंसर विरोधी गतिविधि (इन विट्रो साइटोटोकसिटी) और इम्मुनोमोड्यूलेट्री और हेपेटोप्रोटेक्टिव(बोथ इन वीवो और इन विट्रो) गतिविधियों के मूल्यांकन की रुपरेखा तैयार करना

हल्दीघाटी की दूसरी लड़ाई कोनसी थी जिसमे सीएसआईआर शामिल था ?

हल्दीघाटी की दूसरी लड़ाई मीडिया द्वारा करार दिया गया एक "नियम आधारित " संघर्ष एवं अनुसन्धान मामला है जिसमे घाव भरने के लिए हल्दी के उपयोग में गलत तरीके से यूएस पेटेंट प्रदान किया गया था. नियम यह है की एक लेख की नवीनता, अप्रत्यक्षता और उपयोगिता का प्रदर्शन करने के बाद ही आवेदक के पास नई खोज पेटेंट करने का अधिकार है। घाव भरने के लिए हल्दी का उपयोग नया नही है क्योंकि यह भारत की प्राचीन संस्कृत और पाली ग्रंथों और औपचारिक पत्रों (जैसे भारतीय चिकित्सा पत्रिकाओं के अनुसन्धान जर्नल आदि) में दर्ज पूर्वगामी ज्ञान का हिस्सा है। सीएसआईआर ने मान्यता प्राप्त कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और यूएस पेटेंट ऑफिस को सिद्ध किया कि घाव भरने me हल्दी का इस तरह का उपयोग स्पष्ट रूप से पूर्व ज्ञान का परिडाम था। यूएस पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट निरस्त कर दिया। भारत वह विशेष लड़ाई जीता।

हमारे दैनिक उपयोग में आने वाली प्रौद्योगिकी या मदें जिनमें सीएसआईआर ने भूमिका निभायी है, किस तरह भिन्‍न है?

दैनिक उपयोग की अनेक ऐसी मदों के बारे में जानकर आप आश्‍चर्य चकित होंगे जिनके विकास में सीएसआईआर ने सहायता की है । इसका योगदान मानव गतिविधि के लगभग सभी क्षेत्रों में जैसे कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, रक्षा, वायु गति विज्ञान, अनुवंशिक अभियांत्रिकी और भारत के पहले सुपर कंप्‍यूटर के विकास में भी है । स्‍वतंत्र भारत में विकसित 14 नए ड्रग्‍स में से ग्‍यारह सीएसआईआर से हैं । इसकी संपूर्ण सूची बहुत लंबी हो जाएगी इसलिए यहां केवल नमूने दिए गए हैं । राष्‍ट्र के लिए अमूल बेबी फूड, नूतन स्‍टोव, महिलाओं हेतु सहेली, ए नानस्‍टेराइडल वंस-ए-वीक ओरल गर्भनिरोधक गोली, मलेरिया रोकने हेतु ई-मल (E-Mal), अस्‍थमा हेतु हर्बल चिकित्‍सा संबंधी एजमॉन (ASMON), सारस (SARAS), मल्‍टी-रोल एयरक्राफ्ट, भारत का पहला पेरलेल कम्‍प्‍यूटर फ्लोसॉल्‍वर और सोनालीका तथा स्‍वराज ट्रैक्‍टर्स और भारतीय मतदाता के प्रमाण्‍य की अमिट स्‍याही सीएसआईआर की ही देन है।

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