जल डीफ्लोरिकरण: नालगोंडा तकनीक

जल डीफ्लोरिकरण: नालगोंडा तकनीक
विवरण:
उत्पाद: नालगोंडा तकनीक का उपयोग करके भूजल में अतिरिक्त फ्लोराइड को निकालने की प्रक्रिया।
उपयोग: घरेलू और सामुदायिक उपयोग के लिए 1.5 मिलीग्राम / लीटर के स्वीकार्य सीमा में फ्लोराइड सामग्री के साथ सुरक्षित पेयजल।
विशेषता: पीने के पानी में अधिक फ्लोराइड दंत और अस्थि-पंजर-संबंधी फ्लोरोसिस का कारण बनता है। इस पानी को घरेलू और सामुदायिक स्तरों पर शुद्ध किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में कच्चे पानी में एल्यूमीनियम नमक, चूने और ब्लीचिंग पाउडर को डाला जाता है जिसके बाद ऊर्णन, अवसादन और निस्पंदन होता है। घरेलू स्तर पर उपचार एक बाल्टी या किसी भी प्लास्टिक कंटेनर में किया जाता है। सामुदायिक स्तर के लिए, भरण और निकालना प्रकार के 400 एम3 / दिन तक की क्षमता के संयंत्र उपयोग किये जाते है।
व्यावसायीकरण: व्यावसायिकता
अर्थव्यवस्था: घरेलू स्तर, क्षमता 25 लीटर / बैच: रु 400 समुदाय स्तर, क्षमता 400 एम3: रुपये 5 लाख
निवेश: ----
उपकरण: एफसी / आरसीसी सेटिंग टैंक, फ्लैश मिश्रण और पंप, ऊर्णन करने वाला, तीव्र ग्रेविटी रेत फिल्टर और कीटाणुशोधन इकाई।
कच्ची सामग्री: उच्च फ्लोराइड कच्चा पानी, फिटकिरी, चूना, ब्लीचिंग पाउडर
संस्थान: राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान
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