नवाचार संरक्षण इकाई (आईपीयू )

बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रबंधन के अन्तर्गत आईपी संस्कृति को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए, सीएसआईआर ने बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी प्रबंधन (आईपीटीएम) योजना को सक्रिय रूप से लागू किया था ताकि सीएसआईआर की बौद्धिक संपदा संपत्तियों का प्रबंधन करके इसके मौद्रिक और रणनीतिक मूल्य प्राप्त किए जा सकें।

अपने उद्भव काल सन 1942 से ही सीएसआईआर ने सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और संस्थानों में चल रहे अनुसंधान एवं विकास कार्य से हुए आविष्कारों के पेटेंट की देखभाल के लिए एक पेटेंट प्रकोष्‍ठ की स्थापना की थी।

सीएसआईआर (आईपीयू-सीएसआईआर) की नवाचार संरक्षण इकाई (आईपीयू ) पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन और कॉपीराइट जैसे विभिन्न रूपों में सीएसआईआर में उत्पन्न बौद्धिक संपदा को सुरक्षित करती है। इसका लक्ष्य दुर्जेय बौद्धिक संपदा संपत्ति को अधिकृत, सुरक्षित और उनका प्रबंधन करना है ताकि सीएसआईआर और राष्ट्र के लिए उचित और उसके अनुरूप मौद्रिक और रणनीतिक मूल्य प्राप्त किये जा सकें।


शासनादेश

नवाचार संरक्षण इकाई (आईपीयू ) के कार्यों में अन्य बातों के साथ-साथ निनलिखित बाते शामिल हैं:

  • सीएसआईआर के आविष्कारों का संरक्षण - सीएसआईआर प्रयोगशालाओं/संस्थानों में चल रहे अनुसंधान एवं विकास से उत्पन्न पेटेंटों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाइल करना, उनका अभियोजन करना और उनका रखरखाव करना;
  • आईपीआर के अन्य रूपों जैसे ट्रेडमार्क, डिजाइन और कॉपीराइट को सुरक्षित करना;
  • सीएसआईआर के आईपीआर उल्लंघन और प्रवर्तन की जॉंच करना;
  • आईपी प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ बदलते आईपी कानूनों से परिचित रहना, साथ ही साथ आईपी कर्मियों, व्यवसाय विकास समूह और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों / कार्यशालाओं के माध्यम से ऐसे परिवर्तनों के बारे में अद्यतन करना;
  • आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए सीएसआईआर में रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना;
  • पेटेंट और अन्य आईपी दस्तावेजों में निहित तकनीकी-कानूनी और व्यावसायिक जानकारी को समझने, व्याख्या करने और विश्लेषण करने के लिए वैज्ञानिकों के बीच कौशल विकसित करना;
  • व्यापारिक लाभ प्राप्त करने और प्रतिस्पर्धा को दूर करने के लिए, रणनीतिक गठजोड़ / अंतर्राष्ट्रीय एस एंड टी सहयोग बनाने के लिए, रक्षात्मक और आक्रामक रूप से पेटेंट पोर्टफोलियो का प्रबंधन करना;
  • आईपी से संबंधित मुद्दों और मामलो पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सोच को संचालित और प्रभावित करना; तथा
  • स्कूली छात्रों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और अन्य जो अपने आईपी की रक्षा करना चाहते हैं, उनमे आईपी के प्रति जागरूकता पैदा करना।


सीएसआईआर आईपी नीति का उद्देश्य:

"पुरस्कारों की एक विवेकपूर्ण प्रणाली के माध्यम द्वारा नवाचार के उच्च स्तर को प्रोत्साहित करके, आईपी के लिए समय पर और प्रभावी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करके तथा आईपी के मूल्य को बढ़ाने के लिए रणनीतिक गठबंधनों का लाभ उठाकर सीएसआईआर के अपनी बौद्धिक पूंजी के लाभ को अधिकतम करना"।


आईपीयू के बारे में

बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रभावी प्रबंधन ने सीएसआईआर को एक संगठन के रूप में वैश्विक आईपीआर रडार पर रखा है। सीएसआईआर ने अपनी आईपीआर सुरक्षा के लिए एक केंद्रीकृत परिचालन प्रणाली को अपनाया है।

आंतरिक पेटेंट प्रकोष्‍ठ/यूनिट को 1995 में बौद्धिक संपदा प्रबंधन प्रभाग (आईपीएमडी) में उच्चीकृत किया गया था, जिसे अब नवाचार संरक्षण इकाई (आईपीयू) के रूप में पुनर्नामित किया गया है, ताकि आईपी उत्पादन, संरक्षण और क्षमता निर्माण में विश्व व्यापार संगठन(डबल्यूटीओ) बनने के बाद की चुनौतियों का सामना किया जा सके।अतः विश्व व्यापार संगठन (डबल्यूटीओ) के प्रभाव में आने के साथ, इस इकाई ने बौद्धिक संपदा (आईपी) के पेशेवर प्रबंधन को एक मूल्यवान संसाधन के रूप में लिया। आईपीयू ने बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), नवाचार और प्रौद्योगिकी प्रबंधन के विविध पहलुओं पर क्षमता निर्माण हेतु बड़े पैमाने पर प्रयास किए हैं।

नवाचार संरक्षण इकाई (आईपीयू) सीएसआईआर प्रयोगशालाओं/संस्थानों के साथ-साथ सीएसआईआर के ईएमआर अनुदानग्राही और एनएमआईटीएलआई (निमितली)

परियोजनाओं जैसी सीएसआईआर योजनाओं द्वारा किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न बौद्धिक संपदा की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा करता है। इन गतिविधियों में सभी प्रकार की बौद्धिक संपदा जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन, कॉपीराइट इत्यादि की सुरक्षा निहित है। भारत में पेटेंट प्राप्त करने और पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन, कॉपीराइट हासिल करने से संबंधित सभी गतिविधियां पूरी तरह से स्वतः संचालित की जाती हैं।

इस प्रकार की गतिविधियों में पेटेंट योग्यता मूल्यांकन और विभिन्न देशों की आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकी-कानूनी-वाणिज्यिक पेटेंट आवेदन तैयार करना, आईपी अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए उनका अभियोजन करना और बाद में सीएसआईआर की आईपी संपत्ति की सुरक्षा और रखरखाव शामिल हैं। इसमें अनुदान-पूर्व और अनुदान-पश्चात विरोध/अभियोजन भी शामिल हैं।

हाल ही में, आईपीयू ने सीएसआईआर के आठ विषयों के अनुसार सीएसआईआर के आईपी पोर्टफोलियो की एक व्यापक विषयगत समीक्षा शुरू की है।

भारत के जैविक विविधता अधिनियम, 2002 से संबंधित आईपीआर मुद्दों के अनुपालन से संबंधित गतिविधियों को भी आईपीयू में 2005 के प्रारम्‍भ में शुरू किया गया था; जिसमें भारत से प्राप्त/में होने वाले जैविक संसाधनों से जुड़े आविष्कारों के मामले में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण(एनबीए) की मंजूरी लेने की सम्‍पूर्ण प्रक्रिया शामिल है।

इन गतिविधियों में अनुमोदन के लिए आवेदन दाखिल करना, अभिगम और लाभ वितरण [एबीएस] समझौतों के निष्पादन के माध्यम से जैव विविधता प्राधिकरण

(एनबीए) से अनुमोदन प्राप्त करना और; अनुपालन के लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय में अनुमोदन दाखिल करना शामिल हैं।

आईपी अधिकारों को सुरक्षित करने के अलावा, आईपीयू सीएसआईआर के सभी सहमति ज्ञापनों और अनुबंधों के साथ-साथ आईपी अनुच्‍छेदों के पुनरीक्षण में भी शामिल है।

आईपीयू के शासनादेश में आईपीआर के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करना भी शामिल है जिसमें सभी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में आईपी प्रक्रियाओ में सामंजस्य के लिए आईपी समन्वयकों की बैठक आयोजित करना; टाईफैक (टीआईएफएसी) महिला वैज्ञानिकों को कार्य प्रशिक्षण प्रदान करना; स्नातकों को अल्पकालिक इंटर्नशिप प्रदान करना; आईपी प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर एचआरडीसी, यूआरडीआईपी, आईपीओ और कानूनी फ़र्म के सहयोग से संगोष्ठी/सम्मेलन/बैठकें आयोजित करना शामिल है।

स्कूली छात्रों के बीच आईपी जागरूकता पैदा करने के प्रयास हेतु, आईपीयू प्रतिवर्ष स्कूली बच्चों के लिए सीआईएएससी - सीएसआईआर इनोवेशन अवार्ड को आयोजित करता है। और पुरस्‍कृत किए गए प्रस्तावों को उनके आईपीआर पंजीकृत करने के लिए सभी प्रकार की सहायता भी प्रदान करता है।